“पकौड़े देश”  की राजनीति

“पकौड़े देश”  की राजनीति

“पकौड़े देश”  की राजनीति

आज के हालात में पीएम मोदी जिस चीज को हाथो से  छू ले  वो सोना हो रही है, ऐसे में पीएम ने पकौड़े को तो मुँह ही लगा लिया. बस फिर क्या था, पीएम मोदी के मुँह से ‘पकौड़े’ शब्द का उच्चारण क्या हुआ,पकौड़े देश की राजनीति पर छा गया. आज पकौड़े ने नेताओं के दिलो में एक अहम स्थान बना लिया है. मुद्दे के रूप में पकौड़ा आज विपक्ष की पहली पसंद बन गया है. इन दिनों भाजपा और विपक्ष के बीच बयानों में पकौड़े का किरदार बड़ा अहम् हो गया है.

कल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राज्यसभा में अपना पहला भाषण देते हुए कहा कि “बेरोजगारी से अच्छा है कि पकौड़े बेचना, परिश्रम से पैसे कमाना…”बस फिर क्या था, पकौड़ा फिर सुर्खियों में आया, यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में भाजपा के विरोध में पकौड़ा प्रदर्शन आयोजित किया, उन्होंने छत्तीसगढ़ में शिक्षित बेरोजगार पकौड़े सेंटर ही खोल दिया. उन्होंने बैनर पर लिखा ‘हर साल 2 करोड़ की नौकरियां भजिया बेचने को मजबूर..और तो और पार्टी के कुछ नेताओं ने पकौड़े तल कर विरोध जताया.

इसी क्रम मे अभी पकौड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है और विपक्ष इस लज़ीज मुद्दे को फ़िलहाल छोड़ने के मूड में नहीं है.

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