मुंबई अंतररास्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनल का नाम बदल कर श्री छत्रपति संभाजी महाराज रखे : श्री अरविन्द सावंत

मुंबई अंतररास्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनल का नाम बदल कर श्री छत्रपति संभाजी महाराज रखे : श्री अरविन्द सावंत

मुंबई अंतररास्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनल का नाम बदल कर श्री छत्रपति संभाजी महाराज रखे : श्री अरविन्द सावंत

(राजेश धोत्रे) मुंबई :- शिवडी विद्यमान खासदार और शिवसेना के उमदा नेता श्री अरविन्द सावंत जी हमेशा खबरों में छाए रहते है पर ऐसे ही नहीं, कुछ न कुछ विधायक कामो में अपना कार्य सम्पूर्ण करने की कोशिश उनकी रहती है. चाहे वो सत्ता में रहे या सत्ता से बाहर रहे.
पिछले कुछ सालो से उन्होंने बहोत से कामो को अंजाम तक पहुचाया है , केंद्र तथा राज्य सरकार के महकमो मे पीछे पढ़ कर कार्य किया है. उनके अनुसार और भी बहोत सारे काम अभी भी बाकि है जिनके पीछे वो अभी भी पढ़े है जिसमे मुंबई के भिन्डी बाज़ार स्थित क्लस्टर डेवलपमेंट का मुद्दा, जो की वहा के रहिवासी तथा एरिया डेवलपमेंट की बात हो. या फिर शिवडी और नायगाव के बी डी डी चाल के पुनर्निर्माण की हो.
और आजकल जो फेरीवालो का अतिक्रमण का विषय जोरोपर है. सावंत जी ने ही इस विषय की पहल सालो पहले रेल भूखंड पर हो रहे अतिक्रमण की बात उठाई थी. और महाराष्ट्र शासन द्वारा उनके पुनर्वसन का भी मुद्दा उठाया था.
अरविन्द सावंत की प्रमुख मांग यह है. की जो भी ब्रिटिश कालीन मुंबई के रेल स्टेशन है. जैसे की संदार्स्र रोड, करी रोड, बॉम्बे सेंट्रल, ग्रांट रोड, चर्नी रोड, कॉटन ग्रीन, और रे रोड, के नाम बदल कर लालबाग स्टेशन, डोंगरी स्टेशन, प्रभादेवी स्टेशन, नाना शंकर शेट रेल स्टेशन, गावदेवी स्टेशन, गिरगांव स्टेशन, कालाचौकी रेल स्टेशन, घोड़पदेव रेल स्टेशन, करने की मांग है.
मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के मुंबई अंतररास्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनल का नाम बदल कर श्री छत्रपति संभाजी महाराज के नाम पर रखने की उनकी मांग है. और साथ ही मुंबई का जो विशाल समुद्री किनारा है उसका भी विकास सही तरीके से हो इसलिए लिए अरविन्द सावंत जी हमेशा विविध सरकारी मंत्रालयों में पत्र व्यवहार किया है. यहाँ एक बहोत महत्वपूर्ण मुद्दा है जहा तक मुंबई के विशाल जनसंख्या का प्रश्न है. अगर समुद्री मार्ग विकसित हो जाये तो आवाजाही की बहोत बड़ी समस्या दूर हो जाएगी. और मुंबई का विकास सर्वागीण तरीके से हो सकती है.
मराठी लोगो पर हो रहे अन्याय के प्रति वो हमेशा जागरूख रहते है. उनका मानना है के बेलगाव सहित कारवार , भालकी, और बीदर, के मराठी लोगो पैर जो भाषिक अत्याचार हो रहे है. उसे देख कर महारास्ट्र के सर्व पक्षिये लोगो को इक्कठा होकर उनका साथ देने की जरुरत है. और इस अन्याय को केंद्र के समक्ष रखने का प्रयास रहता है. और कुछ ठोस कदम उठाने की जरुरत वो महसूस करते है. ताकि वहा के मराठी भाषिक लोग अपने अप को अकेला महसूस न करे.

TheWestern Volunteer

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