ऐतिहासिक वसई किला बना स्टूडेंट्स का लवर पॉइंट

ऐतिहासिक वसई किला बना स्टूडेंट्स का लवर पॉइंट

ऐतिहासिक वसई किला बना स्टूडेंट्स का लवर पॉइंट

वसई :-  इतिहास के पन्नों पर अपनी छाप छोड़ने वाला वसई किला अब प्रेमियों के लिए पनाहगार बनता जा रहा है। उल्लास नदी के तट पर बसे वसई गांव के निकट यह एक ऐतिहासिक किला है। कभी इस किले पर गुजरात के सुल्तान का राज था। उसके बाद पुर्तगालियों, मराठाओं और अंग्रेजो ने अपनी धाक जमायी। करीब साढ़े चार किलोमीटर पत्थरों की दीवार के अंदर 11 दुर्ग वाले इस किले का उपयोग बंदरगाह के तौर पर भी हो रहा था। आजादी के पश्चात भारतीय पुरातत्व विभाग ने किले को अपने अधिकार क्षेत्र में लेकर राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिया। आज पुराने हो चुके इस किले के अंदर की अधिकांश संरचनाएं खंडहर का रुप ले चुकी हैं और पुनरुद्धार के लिए राह तक रही है।

ज्ञात हो कि वसई रेलवे स्टेशन से 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित वसई किला प्रेमी युगलों के लिए पनाहगार बन चुका है। घर से कॉलेज के लिए निकलने वाले ज्यादातर लड़के-लड़कियां कॉलेज न जाकर किले पर पहुंच जाते हैं और अपने प्रेमियों के साथ बाहों में बाहें डालकर रास रचाते हैं। शिक्षा ग्रहण करने वाले ये छात्र-छात्राएं धरोहर की महत्ता नहीं जान सके। सुबह से लेकर देर रात तक प्रेमी युगलों का झुंड यहां मौजूद रहता है। ये यहां सिर्फ नैतिक गंदगी ही नहीं बल्कि पर्यावरणीय गंदगी भी फैलाते हैं। पुरातत्व विभाग ने कई कानून तो बनाए हैं मगर इस कानून का इश्क के इन परिंदों पर कोई असर नहीं पड़ता। पुरातत्व विभाग इस मामले में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या निरंतर प्रयास से बचाया गया यह किला प्रेमी युगलों के लिए है ? हर महीने इकट्ठा होने वाला ढेर सारा कचरा कौन लाता है ? इस किले में कार्यरत पुरातत्व विभाग के कई कर्मचारी अपने आर्थिक स्वार्थ के लिए ऐसी घटनाओं को सफल बनाने में सहयोग करते हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा कि यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी अस्तित्व खो देगा और वहां सिवाय समतल जमीन के कुछ और नहीं बचेगा। कुछ लोग तो आपको ऐसे भी मिल जाएंगे जो आपसे मूर्खतापूर्ण सवाल पूछेंगे कि इस किले की पवित्रता का प्रमाण क्या है ? बदलते सामाजिक सोच ने जो सवाल खड़ा किया है उससे एक बात तो साफ़ है कि वसई किले का पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होना सिर्फ एक ख्वाब रह जाएगा। जिसकी जमीनी हकीकत सिर्फ इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह जाएगी।

TheWestern Volunteer

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