विरार लोकल को पुरे हुए 151 वर्ष !

विरार लोकल को पुरे हुए 151 वर्ष !

विरार लोकल को पुरे हुए 151 वर्ष !

आज ही के दिन दौड़ी थी विरार टू चर्चगेट पहली लोकल 
आशु विश्वकर्मा / विरार : तालुका के विरार रेलवे स्टेशन से पहली लोकल की शुरुआत को आज 151 वर्ष पूरा हो गया है | विरार से पहली लोकल की शुरुआत 12 अप्रैल सन 1867 में हुई थी, तब सिर्फ एक ही लोकल थी और सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर विरार से चलती थी व रात्रि में वही गाड़ी ५ बजकर ३० मिनट पर यात्रा पूरी कर वापस विरार आती थी |

बतादें कि महिलाओं  के लिए अलग से दूसरे श्रेणी का डब्बा हुआ करता था साथ ही इसके अतिरिक्त एक स्मोकिंग झोन भी था | उस समय इस लोकल में तीन श्रेणी थी जिसमे आम तौर पर लोग दूसरे श्रेणी में ही सफर किया करते थे जिसकी प्रति मील 7 पैसे कीमत थी और तीसरे श्रेणी के लिए 3 पैसे कीमत वसूली जाती थी | उस समय विरार से चर्चगेट के लिए लगने वाला समय आज की अपेक्षा बहु काम लगत था, क्योकि उस समय स्टेशनों की संख्या काम थी | जैसे की नीअल (नालासोपारा), बसीन (वसई), पाणजू (वसई के बीच स्थानक), बेरेवाला (बोरीवली), पहाडी (गोरेगाव), अंदारु (अंधेरी), सांताक्रूझ, बंदोरा (बांद्रा), माहिम, दादुरे (दादर), ग्रांट रोड|  रेलवे के इतिहास में 12 अप्रैल 1867 की अपअपेक्षा आज 16 अप्रैल 1853  को अधिक महत्त्व दिया जा रहा क्योकि इस दिन देश की पहली रेलगाड़ी ठाणे से बोरीबन्दर तक दौड़ी थी लेकिन वह लोकल ट्रैन नहीं थी |
गौरतलब है कि लोकल ट्रैन यह शब्द भारतीय रेलवे के इतिहास में १ फरवरी १८६५ ईस्वी में  इस्तेमाल किया गया था| लोकल शब्द पहलीबार कल्याण से उत्तर और माहिम से पक्षिम क्षेत्रों के लिया उपयोग किया गया था | वक्त के साथ साथ आज लोकल ट्रेन में कई प्रकार की वृद्धि हो गई है कई नई तकनीकोंसे लोकल ट्रेन में बदलाव किया गया है | यह लोकल पहले सर्फ 6 डब्बों की थी लेकिन आज इन लोकलों में बदलाव कर 15 डब्बे की हो गई है | हर स्टेशनों पर पैदल चलने के लिए पुल का निर्माण हो गया है | इसके साथ ही साथ पक्षिम रेलवे के इतिहास में ही पहली बार महिलाओं के लिए विशेष रूप से पहली लोकल दौड़ाई गई थी | इसकी जानकारी पक्षिम रेलवे के CPRO रविंद्र भाकर ने दिया |
आज लोकल ट्रैन में लाखों यात्री सफर करते है, किन्तु इनमे से कई यात्रियों को आज इस दिन के महत्व के बारे में ज्ञात ही नहीं होगा, यह एक दुर्भाग्य पूर्ण बात है | उन्होंने कहा कि मध्य रेलवे की तुलना में रेलवे के इतिहास में इस दिन का महत्व काम ही है |
 ए. के. श्रीवास्तव ( पुर्व चीफ ओप्रशन मैनेजर –  पक्षिम रेलवे)

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