श्री रोकडिया हनुमान जयंती का पर्व धूम धाम के साथ मनाया.

श्री रोकडिया हनुमान जयंती का पर्व धूम धाम के साथ मनाया.

श्री रोकडिया हनुमान जयंती का पर्व धूम धाम के साथ मनाया.

Mumbai (Rajesh Dhotre):- 250 सौ साल पुराना श्री रोकडिया हनुमान मँदिर जोकी महालक्ष्मी मँदिर के पास स्थित है इस मँदिर पर हर साल की तरह इस साल भी हनुमान जयंती का पर्व धूम धाम के साथ मनाया गया । इस शुभ अवसर पर इस वीख्यात मंदिर मेँ हज़ारोँ वक्तों ने दर्शन लाभ लिया । साथ ही इस मँदिर के व्यवस्थापक श्री विरेँद्र अवस्थी,  प्रियँका अवस्थी एवँ संगरक्षक डॉ रजेन्द्र कुमार दिवेदी द्वारा आयोजित किया गया था साथ ही भन्डार्रे का भी आयोजन किया गया था.। इस अवसर पर भंडारे में हजारो लोगो ने शिरकत की.  जिसका लाभ हजारो भाविको ने लिया.

अब सुनिए, श्री हनुमान जी की  जन्म कथा.

सूर्य के वर से सुवर्ण के बने हुए सुमेरु में केसरी का राज्य था। उसकी अति सुंदरी अंजना नामक स्त्री थी। एक बार अंजना ने शुचिस्नान करके सुंदर वस्त्राभूषण धारण किए। उस समय पवन देव ने उसके कर्णरन्ध्र में प्रवेश कर आते समय आश्वासन दिया कि तेरे यहां सूर्य, अग्नि एवं सुवर्ण के समान तेजस्वी, वेद-वेदांगों का मर्मज्ञ, विश्वन्द्य महाबली पुत्र होगा और ऐसा ही हुआ भी। कार्तिक, कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा में अंजना के उदर से हनुमान जी उत्पन्न हए। दो प्रहर बाद सूर्योदय होते ही उन्हें भूख लगी। माता फल लाने गई। इधर लाल वर्ण के सूर्य को फल मान कर हनुमान जी उसको लेने के लिए आकाश में उछल गए।
उस दिन अमावस्या होने से सूर्य को ग्रसने के लिए राहु आया था, किंतु हनुमान जी को दूसरा राहु मान कर वह भाग गया। तब इंद्र ने हनुमान जी पर वज्र-प्रहार किया। उससे इनकी ठोड़ी टेढ़ी हो गई, जिससे ये हनुमान कहलाए। इंद्र की इस दृष्टता का दंड देने के लिए पवन देव ने प्राणि मात्र का वायु संचार रोक दिया। तब ब्रह्मादि सभी देवों ने हनुमान को वर दिए।
ब्रह्माजी ने अमितायु का, इंद्र ने वज्र से हत न होने का, सूर्य ने अपने शतांश तेज से युक्त और संपूर्ण शास्त्रों के विशेषज्ञ होने का, वरुण ने पाश और जल से अभय रहने का, यम ने यमदंड से अवध्य और पाश से नाश न होने का, कुबेर ने शत्रुमर्दिनी गदा से निःशंख रहने का, शंकर ने प्रमत्त और अजेय योद्धाओं से जय प्राप्त करने का और विश्वकर्मा ने मय के बनाए हुए सभी प्रकार के दुर्बोध्य और असह्य, अस्त्र, शस्त्र तथा यंत्रादि से कुछ भी क्षति न होने का वर दिया। इस प्रकार के वरों के प्रभाव से आगे जाकर हनुमान जी ने अमित पराक्रम के जो काम किए, वे सब हनुमानजी के भक्तों में प्रसिद्ध हैं और जो अश्रुत या अज्ञात हैं, वे अनेक प्रकार की रामायणों, पद्म, स्कन्द और वायु आदि पुराणों एवं उपासना-विषय के अगणित ग्रंथों से ज्ञात हो सकते हैं।

TheWestern Volunteer

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